पैसा, पावर और भौतिकवादी सुख-सुविधाओं से लबरेज आज के चुनावी दौर से इतर था पांच दशक पहले का संसदीय चुनाव। सुनकर ताज्जुब होगा कि चना-चबेना, सत्तू और महज 15 हजार रुपये खर्च कर खत्म हो गया था छपरा...from Live Hindustan Rss feed https://ift.tt/2FJwdq8
पैसा, पावर और भौतिकवादी सुख-सुविधाओं से लबरेज आज के चुनावी दौर से इतर था पांच दशक पहले का संसदीय चुनाव। सुनकर ताज्जुब होगा कि चना-चबेना, सत्तू और महज 15 हजार रुपये खर्च कर खत्म हो गया था छपरा...
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